पंचवर्षीय योजनाएं | Five Year Plans | Panchvarshiya Yojana – Full Detail with PDF

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पंचवर्षीय योजनाएं (Five Year Plans)

1947 में आजाद होने के बाद भारत के लिए सबसे बड़ा सबसे मुश्किल काम था | देश को विकास की ओर ले जाना, इसके लिए सही रास्ता दिखाने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1951 से ही पंचवर्षीय योजना(panchvarshiya yojana) को लागू किया गया, जिसमें आने वाले 5 वर्षों के लिए देश में विकास के लक्ष्यों को तय करने और उनको नियत समय में हासिल करने का लक्ष्य रखा गया | इसके लिए 1951 में योजना आयोग की स्थापना भी की गई थी | देश में अब तक कुल 12 पंचवर्षीय योजना लागू हो चुकी है | उसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं को बंद करने का फैसला किया और नीति आयोग की स्थापना करके देश में दूरगामी विकास योजनाओं को लागू किया |
आज कि इस पोस्ट में हम देश में अब तक लागू सभी 12 पंचवर्षीय योजनाओं(Panchvarshiya Yojana) को विस्तृत जानकारी के साथ दी गई है, ताकि आपको किसी परीक्षा में अगर यहां से प्रश्न पूछे जाए तो आप उनका सही जवाब दे पाए तो आप इसे पूरा ध्यान से जरूर से पढ़िए |
Five Year Plans | Panchvarshiya Yojana
 Five Year Plans | Panchvarshiya Yojana

पंचवर्षीय योजनाओं की सूची (List of Five Year Plans)

प्रथम पंचवर्षीय योजना( 1951- 56)

  • इस योजना का प्रारूप K.N.राज ने तैयार किया |
  • इसमें उच्चतम प्राथमिकता कृषि के क्षेत्रों को प्राप्त थी | इसमें 2.1% लक्ष्य विकास दर की तुलना में 3.6% विकास दर प्राप्त हुई |
  • इसमें भाखड़ा नांगल बांध, दामोदर घाटी तथा हीराकुंड बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं भी शुरू हुई |

द्वितीय पंचवर्षीय योजना( 1956- 1961)

  • प्रोफेसर पी सी महालनोविस के समाजवादी मॉडल पर आधारित इस योजना का लक्ष्य औद्योगिकरण था | इसके लिए पूंजीगत माल के उद्योगों पर विशेष बल दिया गया |
  • अर्थव्यवस्था में राज्यों की प्रमुख भूमिका एवं सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार और महत्व के प्रति नेहरू महान महालनोविस मॉडल के अन्य अभिलक्षण थे |
  • इस योजना के दौरान राउकरेला( ओडिशा), भिलाई( छत्तीसगढ़) तथा दुर्गापुर( पश्चिम बंगाल) लोहा इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए |
  • इस योजना में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई |

तृतीय पंचवर्षीय योजना( 1961-66)

  • इसे गाडगिल योजना भी कहा जाता है | इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना तथा स्वतंत्र अवस्था में पहुंचाना था | इस योजना में कृषि और उद्योगों दोनों पर बल दिया गया था |
  • योजना की असफलता के कारण थे- भारत-चीन युद्ध( 1962), भारत-पाक युद्ध( 1965) तथा वर्ष 1965-66 के भीषण अकाल को माना जाता है |
  • इस योजना के अंत तक देश में खाद्यान्न की कमी, मूल्य वृद्धि एवं विदेशी मुद्रा का संकट उपस्थित था | अतः भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन 57% हुआ| अवमूल्यन से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में घरेलू उत्पादों के मूल्य में गिरावट आती हैं, जिससे निर्यात को प्रोत्साहन मिलता है एवं आयात हतोत्साहित होता है |

वार्षिक योजना( 1966-69)

  • इस अवधि में कोई नियमित नियोजन ना होने के कारण इसे योजना अवकाश कहां जाता है | इस अवधि में भारत में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता हेतु हरित क्रांति की शुरुआत हुई |

ध्यान रखें:-

  • भारत में हरित क्रांति की शुरुआत डॉ. MS स्वामीनाथन ने की थी, जबकि विश्व में हरित क्रांति की शुरुआत नॉर्मन बोरलॉग ने की थी |

चौथी पंचवर्षीय योजना( 1969-74)

  • चौथी पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य स्थायित्व के साथ विकास तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्राप्ति थी |
  • इस योजना काल में( 1971 के आम चुनाव में) गरीबी हटाओ का नारा दिया गया | इस योजना में 5.7% की लक्षित विकास दर के स्थान पर, विकास दर 3.3% रही |

पांचवी पंचवर्षीय योजना( 1974-79)

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता था | इस योजना के दौरान वर्ष 1975 में 20 सूत्री कार्यक्रम शुरू हुआ |
  • जनता पार्टी सरकार द्वारा योजना को निर्धारित अवधि से 1 वर्ष पूर्व समाप्त कर दिया गया |
  • छठी पंचवर्षीय योजना( 1980- 85)
  • यह योजना तैयार की गई |जनता पार्टी सरकार द्वारा, वर्ष 1978-83 अवधी हेतु अनवरत योजना बनाई गई, परंतु कांग्रेस सरकार ने पुनः इसे बदलकर वर्ष 1980 से लागू किया | इसका उद्देश्य गरीबी निवारण एवं रोजगार सृजन था | इस योजना में विकास के नेहरू मॉडल को अपनाया गया था |

सातवीं पंचवर्षीय योजना( 1985- 1990)

  • योजना दीर्घकालीन विकास युक्तियों पर जोर देते हुए उदारीकरण पर बल देने वाली थी | 5% के लक्ष्य की तुलना में वास्तविक विकास दर 6.02% रही |

आठवी पंचवर्षीय योजना( 1992-97)

  • यह योजना राजनीतिक तथा आर्थिक अस्थिरता के कारण 2 वर्ष विलंब से प्रारंभ हुई | यह वर्ष 1990 के आर्थिक सुधारों- उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण पृष्ठभूमि में लागू की गई योजना थी |
  • यह योजना जॉन डब्लू मूलर के मॉडल पर आधारित थी | इसमें सर्वोच्च प्राथमिकता मानव संसाधन विकास को दी गई थी | कृषि तथा निर्माण, दोनों सत्रों के लिए इसने उच्च वृद्धि का लक्ष्य रखा | इसका बल आयात तथा निर्यात में वृद्धि, व्यापार तथा चालू लेखा घाटा में सुधार पर था |
  • लक्षित विकास दर 5.6% की तुलना में वास्तविक उपलब्धि 6.68% रही |

9वी पंचवर्षीय योजना( 1997- 2002)

  • इस योजना का प्रमुख लक्ष्य न्याय पूर्ण वितरण एवं समानता के साथ विकास करना था | इस योजना में लक्षित विकास दर 6.5% की तुलना में वास्तविक उपलब्धि 5.4% रही |

दसवीं पंचवर्षीय योजना( 2002- 2007)

  • इस योजना में पहली बार राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर राज्य बाल विकास दर निर्धारित की गई | इसमें सामाजिक लक्ष्यों पर भी निगरानी की व्यवस्था की गई |
  • इस योजना का लक्ष्य प्राप्त उपलब्धियों को बनाए रखना तथा उन्हीं पर आगे विकास करना और विकास मार्ग में आई बाधाओं का हल सुनिश्चित करना था |
  • इसमें लक्षित विकास दर 8.0% की तुलना में वास्तविक उपलब्धि 7.8% रही |

11वीं पंचवर्षीय योजना( 2007-2012)

  • इस योजना का लक्ष्य तीव्र एवं अधिक समावेशी विकास की ओर बढ़ना था |
  • इसमें लक्षित विकास दर 8.1% की तुलना में वास्तविक उपलब्धि 7.9% रही |
  • इस योजना के दौरान भारत में कृषि क्षेत्र में 3.3% की वृद्धि दर प्राप्त हुई, जो कि पिछली पंचवर्षीय योजना से 2.4% अधिक थी | यह अधिकांशत फसलें एवं पशुधन के बेहतर निष्पादन से संभव हुआ |

12वीं पंचवर्षीय योजना(2012-2017)

  • इस योजना का उद्देश्य तीव्र, सतत एवं अधिक समावेशी विकास करना था |
  • इसमें 37.7 लाख करोड़ रुपए( पूर्व योजना से 13.7% अधिक) का खर्च हुआ |
  • इसकी लक्षित विकास दर 8% रही |
  • कृषि क्षेत्र में 4%, विनिर्माण क्षेत्र में 10%, औद्योगिक क्षेत्र में 7.6%, सेवा क्षेत्र में 9% के विकास लक्ष्य रहे |
  • इस योजना के अंत तक गरीबी में 10% तक की कमी लाना तथा गैर कृषि क्षेत्र में रोजगार के 50 मिलियन नए रोजगार अवसरों का सृजन करना भी प्रमुख लक्ष्य था |

15 वर्षीय विजन डॉक्युमेंट

केंद्र सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं को समाप्त कर 15 वर्षीय विजन दृष्टि पत्र लाने का निर्णय लिया है | इसे वित्त वर्ष 2017- 18 से आरंभ किया गया | इसी लाने के पीछे सामाजिक-आर्थिक लक्ष्य तथा सतत एवं धारणीय विकास का एजेंडा शामिल था |
लिए दोस्तों ऐसे ही रोजाना सामान्य ज्ञान पढ़ने के लिए हमारे टेलीग्राम चैनल को ज्वाइन कर लीजिए तथा इस पोस्ट को अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर जरूर से कीजिए |
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Naresh Kumar is Founder & Author Of EXAM TAK. Specialist in GK & Current Issue. Provide Content For All Students & Prepare for UPSC.

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