भारत की जलवायु | Bharat Ki Jalvayu | Indian Geography In Hindi

भारत की जलवायु | Bharat Ki Jalvayu | Indian Geography In Hindi

नमस्कार दोस्तों आज किस पोस्ट में हम आपको भारत की जलवायु के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं | यह टॉपिक सभी परीक्षाओं के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है और यहां पर आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी, तो आप ऐसे पूरा ध्यान से जरूर से पढ़िए |

भारत की जलवायु | Bharat Ki Jalvayu
भारत की जलवायु | Bharat Ki Jalvayu

जलवायु (Climate):-

जलवायु किसी विशेष क्षेत्र में बहुत लंबे समय तक मौसम की स्थिति को कहते हैं | उदाहरण के लिए भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु है |

मौसम (Weather):-

किसी विशेष स्थान पर कम समय के लिए जैसे कि एक दिन की वायुमंडलीय स्थिति को वहां का मौसम कैसे हैं | जैसे 26 अप्रैल 2021 को जोधपुर का मौसम या किसी और शहर का मौसम आदि |
भारत में मौसम संबंधी सेवाओं की शुरुआत 1875 से शुरू हुई | उस समय इसका मुख्यालय शिमला में हुआ करता था | प्रथम विश्व युद्ध के बाद इसका मुख्यालय पुणे में स्थापित किया और तभी से भारत में मौसम संबंधी मानचित्र वहीं से प्रकाशित होते हैं |

भारत की जलवायु (Bharat ki Jalvayu):-

भारत की जलवायु को मानसून के अलावा प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक है - उत्तर में हिमालय पर्वत होने के कारण मध्य एशिया की ठंडी हवाएं भारत में नहीं आ पाती हैं | अगर  सरल शब्दों के साथ मैं आपको उदाहरण से समझाता हूं जैसे चीन के लोगों की आंखें हम भारतीय लोगों से अलग होती है, क्योंकि चीन और मध्य एशिया के देशों में ठंडी हवा के कारण वहां की जलवायु के कारण लोगों में यह परिवर्तन होता है | अगर भारत की बात की जाए तो उत्तर पूर्व के कुछ राज्यों के लोगों में भी इसी तरह के लक्षण होते हैं क्योंकि वहां पर हिमालय की चोटियां अपेक्षाकृत कम से कम ऊंची हैं |
इसके अलावा दक्षिण में हिंद महासागर के कारण तथा भूमध्य रेखा के निकटता के कारण पाई जाती हैं |
मानसूनी पवनों के समय-समय पर अपनी दिशा बदलने के कारण भारत में निम्न चार ऋतु पाई जाती है :-
1.शीत ऋतु (दिसंबर से मार्च तक), 2.कृष्ण ऋतु (मार्च से जून तक), 3.वर्षा ऋतु (जून से सितंबर तक), 4.शरद ऋतु (सितंबर से दिसंबर तक)

भारतीय मानसून संबंधित महत्वपूर्ण बातें (Bhartiy Mansoon Geography Gk):-

  • उत्तरी भारत के मैदानी भागों में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा पश्चिमी विक्षोभ या जेटस्ट्रीम के कारण होती हैं | राजस्थान में इसे "मावठ" के नाम से जाना जाता है
  • दिसंबर-जनवरी माह में तमिलनाडु के तट तथा कोरोमंडल तट पर वर्षा होती है | इस वर्षा के होने का कारण लौटती हुई मानसून या उत्तरी-पूर्वी मानसून के कारण होती हैं |
  • ग्रीष्म ऋतु में असम और पश्चिम बंगाल राज्यों में आद्र हवाओं के साथ-साथ तीव्र वर्षा होती हैं, इसी वर्षा को अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम से जाना जाता है | जैसे कि उत्तर-पूर्व भारत में नॉर्वेस्टर, पश्चिम बंगाल में काल बैशाखी तथा कर्नाटक में चेरी ब्लॉसम और कॉफी वर्षा के नाम से जाना जाता है, क्योंकि एक कॉफी की खेती के लिए काफी लाभदायक होती है | आम की खेती के लिए लाभदायक होने के कारण  दक्षिण भारत में इसे आम्र वर्षा भी कहा जाता है |
  • उत्तर पश्चिमी भारत में ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली शुष्क हवाओं को लू कहां जाता है, यह हवाएं गर्म होती हैं |

दक्षिण पश्चिम मानसून (dakshin paschim mansun)

वर्षा ऋतु में उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है, जिससे मानसून गर्त कहते हैं | इसी कारण विषुवत रेखीय पछुआ पवन और दक्षिण गोलार्ध की दक्षिण-पूर्वी वाणिज्य पवन विषुवत रेखा को पार करके भारत में प्रवाहित होने लगती हैं, इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून (South west monsoon) कहां जाता है | भारत में होने वाली लगभग 80% वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून से होती हैं |
भारत में दक्षिण पश्चिम मानसून दो शाखाओं में विभाजित हो जाता है क्योंकि भारत प्रायद्वीपीय आकार का है, इसी कारण से मानसून की शाखाएं बट जाती हैं | पहली शाखा अरब सागर की शाखा तथा दूसरी शाखा है बंगाल की खाड़ी की शाखा |
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अरब सागर की मानसून शाखा

अरब सागर शाखा का मानसून सबसे पहले भारत के केरल राज्य में पहुंचता है | केरल में मानसून लगभग 1 जून से जून के पहले सप्ताह तक पहुंच जाता है | पश्चिमी तट पर स्थित पश्चिमी घाटों के कारण यहां पर तीव्र वर्षा करता है, लेकिन पश्चिमी घाट की पहाड़ियां ऊंची होने के कारण इसके पीछे की तरफ अर्थात पश्चिमी घाट के पूर्वी की तरफ वाले क्षेत्र में वर्षा कम होती हैं, इसी कारण इसे वृष्टि छाया क्षेत्र कहते हैं | जैसे अगर मैं आपको उदाहरण दूं तो मुंबई में वर्षा ज्यादा होती हैं, लेकिन पुणे में कम होती है, क्योंकि पुणे पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया में पड़ता है |
अरब सागर द्वारा लाई गई मानसून अधिक शक्तिशाली होता है | भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून में होने वाली कुल वर्षा का 65% हिस्सा | अरब सागर से 35% हिस्सा बंगाल की खाड़ी से आता है |
अरब सागर मानसून की एक शाखा सिंधु नदी के डेल्टा क्षेत्र से होते हुए राजस्थान के मरुस्थल से आगे बढ़ते हुए हिमालय पर्वत से जा टकराती हैं और वहां पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड वाले क्षेत्र में तेज वर्षा करती है | क्योंकि हम सब जानते हैं कि राजस्थान में मानसून के रास्ते में कोई अवरोधक नहीं है, इसी कारण यह वर्षा की कमी पाई जाती हैं और मानसूनी पवने अरावली के समानांतर आगे चली जाती हैं |
मेघालय में स्थित गारो, खांसी और जयंतिया की पहाड़ियां बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के कारण अधिक वर्षा लाती है, क्योंकि यह तीनों ही पहाड़ियां इन हवाओं में अवरोधक के रूप में काम करती हैं और उसके बाद यहां पर खूब वर्षा होती हैं इसी के कारण यहां पर स्थित मासिनराम विश्व का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है |
एक तरफ जहां पर पूरे भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा होती हैं, तो तमिलनाडु और कोरोमंडल के कुछ तटों पर वृष्टि छाया के कारण वर्षा काफी कम होती हैं | तमिलनाडु में अधिक वर्षा शरद ऋतु में होती हैं जब उत्तर-पूर्वी मानसून यहां से गुजरता है |
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Conclusion

भारत एक विशाल देश होने के कारण यहां पर जलवायु में काफी बदलाव देखने को मिलता है; जैसे - जम्मू कश्मीर और उत्तरी भारत का हिमालय क्षेत्र तो दूसरी तरफ राजस्थान का रेगिस्तान | लेकिन हमने आपको इस पूरी पोस्ट में काफी सरल भाषा में उदाहरण के साथ समझाया हैं | अगर आपके मन में कोई भी प्रश्न है तो नीचे कमेंट जरुर कीजिए तथा आप यहां पर लिखी गई दूसरी पोस्ट को भी जरूर से पढ़िए | यह सभी पोस्ट आप की परीक्षाओं को ध्यान में रखकर ही बनाई गई हैं, ताकि आप कम समय में इन सभी को पढ़ सके और आसानी से याद भी कर सके | दोस्तों अगर आप आने वाले समय में और भी ऐसी ही जानकारी पाना चाहते हैं और हमारी मेहनत अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजिए |

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